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रक्षा सूत्र ;कलावाद्ध क्या है ?
पिछड़े-दलितों के व्यवहारिक जीवन में हाथ में रंगीन धागा (कलावा या रक्षासूत्र) बांधने की कोई उपयोगिता समझ में आती नहीं है, लेकिन पुरोहितों के लिए यजमान को मानसिक रूप से गुलाम बनाये रखने का एक महत्वपूर्ण प्रतीक अवश्य है। इसे बांधते समय निम्न श्लोक पढ़ा जाता है:-

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वां प्रतिबघ्नामि रक्षे मा चल, मा चल ।।


अर्थ है जिस (रक्षा के द्वारा) महाबली दानवों के राजा बली (धर्म बंधन में) बांधे गये थे, उसी से तुम्हे बांधता हूँ। हे रक्षे! चलायमान न हो, चलायमान न हो।
क्या आज भी दलित पिछड़ों को इसे बांधने को तैयार होना चाहिए ? फिर भी इस वर्ग के उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति अपनी महान पराजय का प्रतीक रंगीन धागा बंधवाकर अपने को बड़ा गौरवान्वित महसूस करते हैं।
 
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